सृष्टि गोदी में नहीं है कोई
इतिहास जो हसे हास
१ दुयीया वास
ना आया भरपूर
भर-हास अभ्यास
खतम करो खडपूर खास
हरियाली निराली गोदी की जमीन
और
एक दुयीया अदर बज()र-बट्टू बीन
सृष्टि गोदी में नहीं है कोई
इतिहास जो हसे हास
१ दुयीया वास
ना आया भरपूर
भर-हास अभ्यास
खतम करो खडपूर खास
हरियाली निराली गोदी की जमीन
और
एक दुयीया अदर बज()र-बट्टू बीन
अब एह च()मचे को देख दर दाड़
बो-तल ख़ाली है तो लेटा है
और भरी है तो खड़ा खाड़
कमाल कहा करा काड़
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th@ do_s ach in()id less _ach
ह() तू() बने एक-दूजे के लिये
इसी लिए तू को हमेशा हा ही मिलता है
तूतू हाहा का हीर पार पी पया पीर
दिल 10-10 दुया दुगना दरीर
ईत्नि मुश्किल से गोदी के पूर्ण पेड़ो के प()चे
प्राणवायु(o*()gen) का आतम-निकास पार पड़ते
उससे भी दुगना असुर घर को अदर बाहर उजाडते
१ दुयीया की हव() की आग मे ()मीन का पा() पना पास-मान
def_nit_ly 0 co_su_ming असुर
बगैर अदर मेहनत ()य बाहर क()म-आयी
भरपूर तूतू मे मे बदपूर बदायी
mo_us o_er&i
be pre-se_t for _h@’s ho_ling
_ere & no_
मेरी तो छल छी छुट्टी क()ट कयी
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_ho_ing 0 out
un_ble to _ope 1 in()id _out
0 _it y-1 bu_let
_urning _id _it _oil
0 _ury 1 h@__et
wa_t to _ook y_ung
0 d_ool _iv 1 du_g
_his don
thi_ pie _art comp_ete
it’ _ime to _et go re_eat
1 wor_d _ews _us o_er_owe-ring
eve_y1 in()id gut
0 e-c_ip-s()s di_empo_ering
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गेरी गाठे गा गठ गयी
मेरी ज़िन्दगी कब बदलेगी
जिन-जिन जी दगी
फुल फा फिम फिम
गोदी में केंगति है काली कीड़ी
दुयीया मे उड़ती है पडपूर पीढी
तल तट तो ताल तीली तीडी
गोदी की ज़मीन पे सजती है शांति से अरथी
तल तट के रथ को न मिली अ और ी त()रथी
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