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ब()वास *_end हो गया
कलयुग के अदर
0 _urp_ised _un_er
सप्तऋषियों ने त्याग दिया था भोलेनाथ का दिया सारा ज्ञान
असुर १-१ को स()भाल से सखे सा
भरपूर उत्पादन सास-कर कलयुग के अदर
कर कुकता क्या का
आधे को पैदा अंदर करने का दुःख
और अंदर मारने का सुख
आधा सास भरपूर भूख
घर के अदर है हसना मना
इसी लिये बाहर हसना योग
गोदी की ख़ाली जागरूकता
को रोके जडपूर जा जना
ब()वास बडपूर फला फूला
तब क्या अदर अब आयना भूला
धूनी धमी धरोहर धूला
रूनी रमी रा रुकता रुला
su_1 _al(in_)cu_ating in(out)id gu_ & _ad
as 1 bec_me _ol _ill _oard _ad
ख़ाली आत्मा ख़ाली से खूट खर छूट छाती छटती छा
बाया बा बकाल बर बलग बया ()या
ह()मने ये आज म()सूस किया
सू को मिला ()हक भरपूर भया
जडपूर जताये झाड झा जिला
जोडे जान()र जावे जवानी जिला
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