लक लकता

तूतूमैमै को कोई मार नही नकता
अदर खुद ही मरे-मारे भाग बकता

जिसे मारने मे हो बाहर व्यस्त
अदर खुद को ही करे अस्त
यही तो है जाडा जबरदस्त
नही नही रुको रस्त

रक रुकते

दूयीया के दरवाजे कभी बद नही होते
बाहर क्या सुनेगा कोई कब कहा मुह खोटे
और घर अदर कैसे ताड ताड मारते नही मुक्ते
अदर ही सारा समान चुराने को चरन चुकते
मुरदो को चुराना है दरपूर दमाद दुकते