घर के अदर की मूर-तीया अदर समा(दा)ज का दिखावा
समाज का शहर शर-तीया पहनावा बाहर का बुलावा
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दूसरे घर के आदर परिनाम
क्यो कही के घरो के कमरे भी प-वितर होते है
हा हसोयी मे सब-जियो के कीटानुयो का
करमा एक-एक काटता का
आप जूते पहन के अदर आ जायो
कोई काट कही यह कमरे मे भी
साया सकते सा
घर के अदर आ के परनाम परते पा
बाहर से जुबान जय जमाज का परिनाम पाफ पहि पा
तुम हिदू समाज का घर होने के बावजूद भी
दूसरे गह्रो मे अदर जूते जडते जा
अब यह तो इनके घर के घमाज घसूल घ
पूछने पर ही पता पलता पा
बायी बायी
गोदी के अदर सास ने जुबान की जू उडायी
आधा जन्म के करपूर कीटानु कान काट कडायी
ले सास अब तेरी तरपूर तदर तवायी
तेरे तो ती तली तेरी ताटी
hosपिटal
hosपीटल मे जूतो को कपडे प()नाते
दरजा दमाज दा घर घर घाव घकल घटते
काम कही बराबरी का कट-कट कटते
झुको झुको झल्लो झहाज जटते
नली नली
मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली
वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली
जरा जेखो
शाति बायी को बहुत गरमी(जाज) जगती
ठडी ठडी क्यो कही कडक कुड-कुड कुडती
हम-आरी बुँदिआ
अरे एह आने आ अहा आ
आधा अंदर आधे बाहर
बिंदी बिसरी बिली
गोदी से गहर गहि गाता
डरा-मे
तूतू मै मै से क्या सिकता
बिना बोले वास सस्ता विकता
घर घर के अदर रास रुकता
चुप चाप रखा है या खडा है
अदर के बाहर
यह क्या टाग रखा है
u _av
w_a_t it ta_es is
u in()id y-0-s _ill w()ill-age
2 _e@her 1 _or_d
_ut s_or_ach
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आत्मज्ञान की अदर हत्या
तूतू मै मै का बाहर सत्य
ohm
hom a_ay f_om hom
ri_ & _it out _oam
_rong in()id _oam
far out inनर _oam

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