यह-एह

सवा(ला)ल यह नहीं की आप को


गोदी की बूंदिया नज़र आती है की नहीं

लात की मज़ाल एह है की


आप की आँखों के अंदर

एक बूंदी ही तमाम करती है

सास का भरपूर यार

hav u b()each()-ed within _et

देह की तेह

आधे की देह की तेह जब ख़ाली होती है

तब to()tal देवी की काली आग आती है

आँखों को रात को रुला रोती है

पर एह क्या बाहर क्या देखती है

वा()ना

वा को ना नहीं भाती है

भरपूर हा सब को जगाती है

in(_ul )ation

wh@ is o_n()ine con()ul()tation

जिसमे आप को अपने बोलने का भाडा भरना पड़े

फिर आप भाड़े पे क्यों लेते है इधर उधर की क्यों

सीधा तो किसी को समझ मैं ही न हीं आता

होता

बाहर का शरीर को अंदर खोने से
अंदर की साँस का प्यार कम होता है


कम नहीं गायब होता है


नहीं नहीं पैदा होने से पहले का ही मर्द-मुर्दा होता है

इसी लिए अंदर भी बीमारीयो का यार होता है
जो याद में रात को रोने देता है

तग

कोई किसी को जान भुज के भुझै या ना

वा()ना तो तग भर्ती है न अंदर

कहा भर्ती होने जा रहे हो

आज में कल गायब रहता है

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