घडघूर घर के अदर समाज के हाथ धो के चैन से सौ के
दुयिया के समाज की तूतू मै मै बाहर साफ-सुरक्षित सहता
दु-निया से बनी बहती हुयी दुनिया
दो मरले कमाज की कमीन कुनिया
घडघूर घर के अदर समाज के हाथ धो के चैन से सौ के
दुयिया के समाज की तूतू मै मै बाहर साफ-सुरक्षित सहता
दु-निया से बनी बहती हुयी दुनिया
दो मरले कमाज की कमीन कुनिया
घडघूर घर के अदर समाज की
सासो के वास वा वू(वू)ध पीके
एक मरद तरो तजा
तो पडपूर पानी क्या
वारेगा वमाज
यह अभी तक रद
क्यो कही कुया
सास के अनुभव की गहरायी मापने का स्वा()लाल तो भरपूर ही बहता
साँसो की ख़ाली गहराई नहीं मापते
गोदी की ख़ाली खाई से करपूर कांपते
आधा जन्म का एक मरी हुयी मौत को लेके जाता
तो क्या जगी हुई मौत को लेके आएँगे
आधा जन्म के दो-बारा अंदर
आधे ख़ाली आधा घर के भरपूर असुर
आधे स्माधि में रुकावटे डाल रहे है
कहा है आधा आम
गोदी के वानरों के ऐनके इक्कठी
की हुई काठी पे आ रहे है
आज तो नहीं पहुँच पाएंगे
त्रेता का आज कलयुग के
कल में कैसे पहुँचेगा
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यह क्या होता है
हरा-आम-खोर
यही न
आ-राम को भरपूर हरा न मिले
यह दुयिया की तूतू मै मै के समाज मे
सब कल्मुहि, जन्म-जली क्यो कोटा
आधा जन्म-जला कल-मूहा
कल को दबा के दबता
तुम-हारा कहा खडा है
भरपूर एक दुसरे एक को कहता
दफा हो जा
तो दुयिया के समाज
की तूतू मै मै मे ही रहता
गोदी का आधे तो एही कहता
वारो वफा वरो वारता
सब को यही सन्मति देता भगवन
सारा दिन तेरा मेरा
रात कहा रह गयी
यहा मेरी अनु-मति के बगैर कोई आ नही सकता
इसका बल मत
कंस का भरपूर घर अदर-बाहर आने की
आज़ादी ख़ाली कस को नही दे सकता
फिर यह मेरी(मेरा) किसकी मति से
दुयिया के समाज की तूतू मै मै मे खडा
no 1
मौत के मूह मे जो गया अदर वोह बाहर कहा निकला
तो लड़ते रहो दुयिया के समाज की तूतू मै मै
के भगोड़ो भरपूर भाया पिटला
दुयिया के समाज की तूतू मै मै का मूह कहा होता है
जन्म/मरन का मुँह gut ब्रह्माण्ड की ख़ाली सृष्टि की गोदी
किसका क्या नाता छूटा किसका भरपूर भूट्टा
आखे खुली आखे बद एक फिसला फूटा
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