खायेँगे

गोदी के माँ बाप भी बिंदियो का

कर्मा-धर्म मिटा नहीं सकते


फिर तूतू मैं मैं के मा बाप कब तक

बूंदियो को दबा के

खरी खाल की खैर में खायेँगे

खाया खे

भगवन को भी दिखता है
मईया को भी सुनता है
पर क्या करे तुम को व()न भाया है
रोग को निखार आया है
पीड़ा भीतर समाया है
समय भी तयारी करके लाया है
खरी खैर खारा ख़ास ख्याल खाया खे

बाझ

अच्छा अंदर के बचे चाहिए


तलवे पैदा करने के लिए


सास तो बाझ है


किसी भी जनम में पैदा कर सकती

थकती हर सास मैं