सड़ सहा

gut nature ने भरपूर के रास्तो में

भारी मुश्किलें खड़ी करदी है इसी लिये

gut गोदी में भारी भरपूर मुश्किलो

का आमना-सामना सामने

सड़ सहा से

रात(दिन)रात

रात को दिन बना रखा है और दिन मे ही बाहर निकलते है न


भरपूर दुनिया भी निकलेगी ब्रह्माण्ड की रात के अंदर


१-१ कलयुग मे ऐसा एक कही कई बार-बार को लेके आता है

धुन ख़ाली खतवाली

आधा बीमा()मुक्त करके आधे ने की ख़ाली


अंदर की भरपूर मज़बूरी नही पूरी पारी


आज के अंदर नही कमजोरी भरपूर है ख़ाली जोरा जोरी


साँस मे gut गोदी घुले ऐसी सुन्दर चोली की चाली चोरी


ब्रह्माण्ड भी खींचे लकीरे भोरी ख़ाली भोरी


ख़ाली धुन से धार धरे ख़ाली खतवाली