कहते है रोगी को बैठना नहीं आता
भिड़ता रोग भगाना भय भाता
इधर उधर एक नहीं इत-राता
इतना भी नहीं ध्याता
बैठा रोग भीतर मु-खोटे लुभाता
कहते है रोगी को बैठना नहीं आता
भिड़ता रोग भगाना भय भाता
इधर उधर एक नहीं इत-राता
इतना भी नहीं ध्याता
बैठा रोग भीतर मु-खोटे लुभाता
भरपूर के रहते कलयुग के भगवन को तो gut मईया मिलने से रही
,जा फिर बाहर कर दी गयी ,
इसीलिए भूखी नींद ही सो रहा है
कितने छोटे लोग है gut गोदी के छोटो के लिए छोटा ही सोचते है
इधर उधर के भरपूर की उचायीया तो हासिल करने से रहे
भरपूर को अपने अंदर के मर्द की पक्की ईंट का यह-सास भरपूर नहीं है
इसीलिए इधर उधर के भरपूर से डर नहीं लगता
भरपूर अपनी मदद अंदर की पक्की ईंटो से करवाता है
फिर तो ख़ाली बैठना भी आसान होगा वेहले के लिये
रोज रोज के झंझट को ख़ाली एक रखो
वेहली आंखे सास के दामाद को
भरपूर प्यार से पड़ती है
इसीलिए भरपूर प्यार की आखे
वेहले को ही स-वारती है
तूतू में में की दुनिया पूरी जेल
एक चोर एक सिपाही का भरपूर खेल
भरपूर आधा इधर उधर पूरा मेल
एक बाहर भागे एक अंदर रेल
अंदर का बच्चा वारा फेल
अब भागो आई सारी बूंदियो की
मईया का gut _op ख़ाली a-वेळ
निराली छाया बांधे ख़ाली gut गोदी ऐल
y _ol_ow l-y _u_te_n
_en y nit has _ull freed()m
to sn@ch full_ess p_een
in()id a wor_d of y o_n to
un()on u gut surface()all
on wor_d _een
is th-is an enjo- -able mo_ent
to clean-mop-clear
gut godi’ ground
bec()me s()able
_t-@ _ent
गोदी के पानी में कच्ची मूर्ति विसर्जित
करने से पक्के अपनी अदर की मर-तियो
की गलती गयी गाती गा गानी गे
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