पडो

सास के दामाद की पढ़ाई बहुत हो

गयी gut गोदी तो पहले से हे डूबी पड़ी है

(पिछले, आज और आगे को मिला के

कलयुगा 2 कलयुगा

भरपूर ने तो इक ही काम भरना है)

दामाद तो हमेशा ही क्यों की निराशा

की आशा को ही पूरा पांडेगा

बांट-वार मर-दो

gut गोदी को मर्दो की जात दिखाते है

अंदर के आम को बांट-वार खाते है

सीता के अपहरण को भीतर बिठाते है

पात इधर-उधर पते की पूरी

पास पतियाते है

s_oot-ly

_ife of y is s_oot_ly ru_ning

in()id u b-a_ter-b, _ife @er

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तुम न तो जीते जो और न ही मरते मो

बस क्यों ज़िदा तो मर()म भी बे-मौत बिदा