on go_z-ill-a
अब ढूंढना एह है कि कहा
छुपा के रखे है अंडे
मिल गये डंडे
बस बस
अब और नहीं on dae
आज ही होगा ख़ाली ज़िले का
hae bae or _tae …
on go_z-ill-a
अब ढूंढना एह है कि कहा
छुपा के रखे है अंडे
मिल गये डंडे
बस बस
अब और नहीं on dae
आज ही होगा ख़ाली ज़िले का
hae bae or _tae …
आधे-()स्सु तो ख़ाली सूखे साढ़े है
भपूर आधा-आधा तो रूखे ()रडे है
स-पनो के अंदर भरपूर पसीना नहीं बहाता
सीना भी तो सेना को एक प से मिलाता
तभी दिन भी सपना बन कर निकल जाता
भरपूर फल मन-तर मुग्ध देखे मस्य का मल निकल जाता
y @_ar are s()in-ing in()id
bharpoor dar_ness
y in()id u @r s_out-ing in/out _oud
is gut alone mother nature
un()not _is10ing
wit()in chi_d
i want ever- -thing in()id y th@
u _eed em()tee 2 this
no
y ()oose
भरपूर सम्मान अंदर का अभिमान
तुमने दिखाया अदर का हमें पहचान
बाहर न उतरे अंदर सेना सीना तान
रखो भरपूर आगे एक मेहमान की जू-आन
well well
_i-thin eie c
u _av no()thing
in()id
a _elf c_ean lin()ing
to()tal _id
छूअेरे छोरे छी छत छाया छाट छावे
की
छाट छत छो छू छावे
छा छा छा छाट छुआरे
भरपूर न तो बाहर के मुह की रखता है और न ही अदर के मुह की
भरपूर की अकल तो मंद मंद है
इसी लिए इधर उधर अकलमंद आ
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