सृष्टि गोदी की ख़ाली शांति तो किसी को भी भरपूर सीख नही देती
फिर भरपूर सास को तो जरूरत भी नही है किसी भी आधा जन्म मे
सृष्टि गोदी की ख़ाली शांति तो किसी को भी भरपूर सीख नही देती
फिर भरपूर सास को तो जरूरत भी नही है किसी भी आधा जन्म मे
तुमने क्या सोचा था विधा(वा)ता के लिखे हुये
भाग्य को अंदर ही ख़ाली मोड़ोगे
तुम तो आधा जन्म का उदय हुया
भरपूर अदर-बाहर बदलोगे
घर एक मन(का-भरपूर)दर होता है
जिसमे अदर का भरपूर वीर(य-ज)मान एक एक होता है
ਜਿੰਨੂ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰ ਦੀ ਸਮਝ ਨਾ ਹੋਵੇ
ਉਹ ਬਾਹਰ ਦਾ ਲਿਖਯਾ ਪੜਾਇਆ
ਅੱਧਾ ਜਨਮ ਈ ਅੱਖਾਂ ਮੀਤ ਜਾਵੇਗਾ
ਤੇ ਅੰਦਰ ਦਾ ਸਿਖਣ ਆਇਆ
ਅੰਦਰ ਨੀ ਅੱਖਾਂ ਲਬਦਾ ਲਿਆਯਾ
क्या पूरे
च()-दर-मा को गिल्टी-फिल्टी
अदर हो दमा भरपूर गया
आज कुछ नही भर भरपूर सकता
()क्कन धु-ठुला ही रह आया
यह तो पीछे का भरपूर करता धरता माया
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ना तुमने कोख मे रह खुश नही सीखा
जो हम तुम्हे आज सिखाये
लाते अंदर ही मरवाते है
बाहर दिखाने से गोदी ही रोती है
९ महीने रह के क्या किया
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(अच्छा अच्छा ()डे तोड़ रहे थे )
यह लो
लाते भी बीमा()र
अब शुरू से अंत भी त्यार
अब इस बल का क्या मत है
मध्य म()य झूठ नही बोलता या बुलाता
म()य नही अदर लेटता
गाठ को झूठ ही दीखता
बल मत तो एक ही रहेगा
म()य और केंद्र भीतर ही होते है क्या
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