सांसो की बलि ऐसे सोती सा
शिशु के आते ही ख़ाली आहट आती आ
सांसो की बलि ऐसे सोती सा
शिशु के आते ही ख़ाली आहट आती आ
आधे के पास पडपूर पैसे पही पा
गोदी की ई()जत सुरक्षित साक्षी सा
क्या कही
मोरी मईया मेहदी अब आधे जगईआ जाओजी
आधे आन ओ()या आधा ख़ाली खान खोया
an em_tee b_eat_ing ob_ec_ive is wiw o _o()tal _i_ence
आधे की मईआ की गोदी के ख़ाली घर मे आधे
खाली मटकी तो ख़ाली पानी के
पार से ही पूट पई
इधर उधर ख़ाली बह गया
गोदी दिन ख़ाली देह दिए
शाम श()माये धार धाली धमाए
एह ऐसा आधा
अंदर-बाहर ख़ारा ख़ाली खाआ
आधे अदाआ आद-()नाद आत्माआ
सदिओ सदा स्माधि सुला सिधाया
ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
हम आभारी
अभी-आरी, आभा-आरी, आओ-भारी
अहि गोदी के गहरे ग()म ग()म गच्छामि
आधे शब्दों को ख़ाली सफे से सिखता सा साकि
सफ़ेद सफा सिखाए सो साफ़ सुलाए
गोदी सुंदर सुहाए
आधे अपने अंदर आरा
हर युग में आधे
धूनी धन धाँसू धराहा धारा
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