कैवल्य आधे केवल व()न को साधे
रह जाओगे अंदर आधे
जब सांसे ख़ाली वाह देह
कैवल्य आधे केवल व()न को साधे
रह जाओगे अंदर आधे
जब सांसे ख़ाली वाह देह
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_ind to बुंदिया
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4
बुंदिया are pur()ing
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रुख भी बताते है का अंदर का रास्ता
जो वाह पड़े सामने का वास्ता
अंदर ही गुम हो चले का नास्ता
देहरो न रोको भीतर ख़ाली निकास्ता
to()tal ख़ाली न तो महसूस होया है
न दिखता है
न सुनता है
न रोता है
सब कुछ ख़ाली करता है
to()tal gut गोदी के अंदर
सास तो अपने अंदर के
_ut के प्यार के का(कितने)बिल नहीं है
तो फिर gut मईया का
सारा प्यार तो सिरफ ख़ाली
बूंदियो के पास
अंदर ख़ाली
चुप छुप चुप
है
सास को प्यारी बनाने वाले
तो उपस्तिथ नहीं है अंदर
ख़ाली सड़क
ख़ाली भडक
कैसे धरो ध्यानी धड़क
छूटे ना छुड़ाये कैसी लडक
खींचे तार भिड़े सदक
डर खडी दर है के बैठी है
ख़ाली है तो निराली घर
अंदर दिवाली है
a pl_a-n to p__c in()id pro_oun within ______ un()n-own
आज की आंखे बंद करने का फायदा कोई क्या है
—–
व()न के भीतर शिकारी
है अंदर के भीखारी
आये है लूटने gut की क्यारी
अब तो एह कुड़ी नहीं 2()tal प्यारी
आई है कल के काल की ठुमारी
साध लो अंदर भरपूर बीमारी
अंदर बाहर ख़ाली खू-मारी
आ गई e-नर की ख़ाली कुमारी
सफ़ेद घोड़े पे सवार ख़ाली निराली हमारी
—–
बूंदियो का पहरा-वा ख़ाली
दोगुना बिठा दो
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re()em_er adhe’
mum_er
010
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