ख़ाली आत्मज्ञान साँस के भीतर से सृष्टि गोदी के अंदर ही ख़ाली समाता है
बाहर की दुनिया का सीखा सास के अदर को भरपूर अपवित्र मे-ला ही भाता है
ख़ाली आत्मज्ञान साँस के भीतर से सृष्टि गोदी के अंदर ही ख़ाली समाता है
बाहर की दुनिया का सीखा सास के अदर को भरपूर अपवित्र मे-ला ही भाता है
हम मईया की ख़ाली आँखों में ही
काले-से-सफ़ेद-से-काले होते है
गोदी की आयने ख़ाली ही मजबूत होते है
सृष्टि को संजोए भीतर की धारे ही
ख़ाली साँस होते है
बलराम, सुभद्रा, नीलामणि को ख़ाली आधे मईया ही मिली
gut ब्रह्माण्ड के काल-रात्रि-युगा के भू के अंड में
देवो के ख़ाली देव
नंदी के महा-देव
चन्द्रमाँ का आधा सेव
ख़ाली पर्व की सती के सदैव
ख़ाली अन्तर(म)यानि है
भू के ख़ाली त्रिदेव
मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
ख़ाली सांसो को दिखाना-सुखाना भी क्या जरूरी होता है
ल-लो लान लो
गोदी का ख़ाली ज़माना भी सारा पुराण माना ख़ाली होता है
भीतर ही बहे ख़ाली आम सारा संसार धोता है
o सृष्टि गोदी की मईया
ख़ाली शुन्य हो पूर्ण विवरण की वर्णमाला के ख़ाली अक्षरों का धर्मा
mae aum()tea shunea is to()tal absolute dia lit
each breath’ mandala of all em()tee realms of em()tee being
hol 1 dark_ess e*pelling in(out)id purging
within aum()tea विद्या
a शुन्य gut is to()tal em()tee 0 in(out)id a_on u
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
a babi breath is qute
though wiw o babi is sound of aum()tea mute
be carried all along in(out)id ro_t
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