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अनगिनत सास की भरपूर किताब
आज ही होगा भरपूर ताव का हिसाब
दिल थाम के रखो अदर हिज़ाब
इधर उधर लेगा एक एक का नवाब
बहार न निकले ज़ुबान का रुबाब
देखो अंदर ही रहे इत-काम का
भरपूर जवाब
आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
असुरो को घूंघट ओड़ के रखना चाहिये
gut गोदी के अंदर
उससे भरपूर आखे फट जाएगी
और घु-घट को भी पहाड देगी
जो भरपूर कड़वा बोलते है
वोह अदर बाहर के भरपूर को धोखा देते है
और जो मीठा बोलते है
वोह इधर उधर के भरपूर को
मीठे के सदवा में तोलते है
जहां सूर्य की रौशनी नहीं
वहां है gut गोदी का अँधेरा ढूंढे
अंदर की ख़ाली रोहिणी का
सफेरा
अब भरपूर ने राह तो निकल ही दी है
मिला देगा कल की
चाह से कौन छुपाये
भरपूर के इधर-उधर के वास्ते
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(he-s_e-we)al-thy
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