ख़ाली बातें सम्पूर्ण

सास के दामाद पे

अंदर की लाते

पड़ रही है की

सो रही हसी की


gut nature’ की ख़ाली

बातें सम्पूर्ण हो रही है

(एह आधा म क्यों बिंदी क्यों नहीं)

ख़ाली निराली हमारी

आज की आंखे बंद करने का फायदा कोई क्या है

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व()न के भीतर शिकारी

है अंदर के भीखारी

आये है लूटने gut की क्यारी

अब तो एह कुड़ी नहीं 2()tal प्यारी

आई है कल के काल की ठुमारी

साध लो अंदर भरपूर बीमारी

अंदर बाहर ख़ाली खू-मारी

आ गई e-नर की ख़ाली कुमारी

सफ़ेद घोड़े पे सवार ख़ाली निराली हमारी

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बूंदियो का पहरा-वा ख़ाली

दोगुना बिठा दो