मंथन-निशानी

असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन


सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण


काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण


और आधे बैठा है निचे ध्यानी


नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी


कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी

सहज

भरपूर सास के भरपूर दामाद के पास सब कुछ भरपूर है

बस नहीं है तो अच्छी in()id gut ख़ाली प्रकृति

जिससे सृष्टि गोदी के सुर अंदर ख़ाली सहज रहते है

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असली ल(प)ढ़ाई तो अब होगी


आधे सांप और भरपूर निवाले की


भरपूर शरीरो तो गिरा पड़ा है

अदर की बीमा(या)रियो के मर-दो

की लाठी से


लेकिन भरपूर ज़ुबान की जवानी

तो कायम रहेगी


ख़ाली माँ को ललकारो भरपूर भरो


तथा(अ) स्तु


आधे आम
हांजी

ਕਲੇਸ ਪ੍ਰਵੇਸ

ਮਤਰੇਈ ਮੈ ਕਹਿੰਦੀ ਆ

ਪੁੱਤ ਤੂੰ ਬੈਠ ਕੇ ਭਰਪੂਰ ਪੜਾਈ ਪੜ

ਭਰਪੂਰ ਸੂਰਮੇ 1 ਦੁਨੀਆਂ ਭਰਪੂਰ ਭਰੋਗੇ

gut ਮਾਂ ਨੇ ਕਦੀ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕਿਹਾ

ਅੱਧਾ ਪੁੱਤ ਭਰਪੂਰ ਨੂੰ ਖਾਲੀ ਅੰਦਰ ਬਾਹਰ ਕੱਢ

ਖਾਲੀ ਸਾਹ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਖਾਲੀ ਅੰਦਰ ਰੱਖਣਗੇ

s_ep sis-ers ਕਲੇਸ in()id

gut ਭਰਪੂਰ ਸਾਹ ਪ੍ਰਵੇਸ