दा दयाद द्वार


काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ

आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया

ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया

आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया

सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया

काल(चक्र)की

काल्की बिछाए ख़ाली आधे पालकी


दुल्हन की सृष्टि ख़ाली गो()का लाल की


डोली की ढाल अंदर ख़ाली लकीर धरो की


ख़ाली उठाए साँस का सौभाग्य चार कंधार की


भीतर ही तरी ख़ाली साँस उद्धार की


आधा झांके हाँजी हाँजी ख़ाली रजा उध्हार की

सारा -शक ख़ाली

मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी


धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी


गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी


दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी

श्री गाय()त्री

o सृष्टि गोदी की मईया


ख़ाली शुन्य हो पूर्ण विवरण की वर्णमाला के ख़ाली अक्षरों का धर्मा

mae aum()tea shunea is to()tal absolute dia lit

each breath’ mandala of all em()tee realms of em()tee being

hol 1 dark_ess e*pelling in(out)id purging

within aum()tea विद्या