भू-लक्कड़

आधा को क्या भूलने की पड़ी है

या फिर भू के अंदर भरपूर

भूलक्कड़ लाने की लड़ी है


फिर तो लगता है की


लक्कड़ का ख़ाली आधे

भू के ख़ाली आ-ईरादे


खींची जाए सीधी नाक


चुप चाप भागे नेक न दे

गंजु

नन्दु तुम्हारे अंदर के किले की कला ख़ाली बंधु है

चारो और का ख़ाली यश भी मन मुघ्द ख़ाली संधु है

तो फिर गोदी की गंध भी ख़ाली सुगंध सिंधु है

आधे आम तो ख़ाली गेंदा गंजु है