भरपूर बाड़

मौत को छूआ

और छू नहीं आई

मौत को डराया तो क्या छूया छायी

अब तो तेरी छू भरपूर भायी

गिरा तू अंदर भरपूर बाड़ बाई

मौत भरपूर भागते का भाग्य

भाग भरपूर भाई

भरपूर डर

gut गोदी ने तुम्हे अन्न दिया

अंदर-बाहर को तन-दुरुस्त रखने के लिए


और तुमने तूतू में में की मूर्खता का

भाव दिखाकर अपने ही अंदर के

आधा को भरपूर तन के

इधर-उधर डर से डराया


अब अन्न कैसे सुरक्षित करेगा

भरपूर तन की बीमारिया तो

भरपूर डर से गहरी डूबी है

खता

भरपूर आधा खुद के अंदर

ख़ाली आधे को महसूस नहीं कर सकता

और इधर-उधर तूतू में में की

भरपूर हिम्मत आधा

अंदर को तोड़ेगी

मूर्खता की हद की

खता नहीं होती

प्यार तो भरपूर है