(ब)

तुम्हारे आ()प का राज है जो ख़ाली

tot में उचा बोलो


और जब पूरे पाप अंदर आ जाये तो

१० को खिसका के १०० का

भरपूर भर भय भो

gut गोदी जब भी दिखावे

भरपूर क्यों

आग चुबती है क्यों

भरपूर को सास के दामाद के घर का

दिखावा भरपूर भाता है अंदर बाहर

इसी लिए खावा भी उछालता है

ऊंचाईयो की क्यों को ख़ाली ज़मीन पर

बड़ी तीखी आग चुबती है क्यों

तुम्हारा ध्यान तो क्यों पर ही अटका है

इसके सिवाये पूरा भटका है

इधर क्यों

उधर क्यों

अंदर क्यों

बाहर क्यों

सास क्यों

दामाद क्यों

क्युकी दामाद तो है यूकि

अदर का दामाद है क्युकी

ख़ाली ध्यान तो अंदर ख़ाली झटका है

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तुम न तो जीते जो और न ही मरते मो

बस क्यों ज़िदा तो मर()म भी बे-मौत बिदा

य-कीन

भरपूर को अपने अदर के असुर

होने का यकीन घर के बहार के

असुर से मिल कर तो हो ही

आता है न अंदर

का यकीन क्यों

नहीं बाहर मिलता