सपनो की फिक्र

अपने सपनी से ज्यादा अपनो के भरपूर सपनो की फिक्र रहती है


भरपूर का फायदा तो पूरा ही होना चाहिये


मार धाड़ के सपने तो सब के एक है


मुझे आगे बड़ना है


अब यह भी ले लो


भरपूर न तो पिछे हटता है और

न ही आगे निकल नाता है


यह तो बीच में हे कही अटका हुआ है


मद मद का अकल है

निकल गया

स-पनो के अंदर भरपूर पसीना नहीं बहाता


सीना भी तो सेना को एक प से मिलाता


तभी दिन भी सपना बन कर निकल जाता


भरपूर फल मन-तर मुग्ध देखे मस्य का मल निकल जाता