ध(क)रता

भरपूर निवाला जुबान को अदर नही गिरने देता


या


भरपूर जुबान हवाले को निवाले की सैर भरने देता


कुछ भी कहो भरपूर तो पूरा ज़ुबानी ही भरपूर निवाला धरता


भरपूर मे()नत मेह()बान जुबान का एक करता

खा(ज-स)जाना

चुरा लिया खाज-सजाना


अब भायो भरपूर नज़रो का नाज़-नाना


अंदर के काम से आँखे चुराना


दागियो का अंदर भरपूर घराना


इकठे जिन-जिन भरपूर निभाना


अनजान न जाने भरपूर काज निशाना

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भरपूर घर के अंदर ख़ाली काम की आंखे चुराते है

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और कहते है


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_et _or _ol_um but2_