भटूरे छोले अदर की भरपूर आग मे
साम्भा सभाल सगे
भटूरे छोले अदर की भरपूर आग मे
साम्भा सभाल सगे
जरो जरो भरपूर आखे खोल के क्यों पड़ते हो mandalalit
एक बरी न-ही डूब होता तुमसे
फिर हा हा करते रहना
hand( l )sum
भरपूर or ख़ाली
no भरपूर _ou_t
a-lon u _ar sc()amb_us_er
a 1 hu_an being has to com_are भरपूर is bus-y rela(y)at_ing ()ach 1 in()id
बहती है नाडी
अदर के भरपूर झरने मे नही
भरपूर भाव की भरपूर नायिकायो को समझो भरपूर
बुँदिया क्या si_ing o_ation दे रही है
ਇਕ ਚੰਡ ਪੈਣੀ ਕਨ ਤੇ ਪੂਰੀ ਲਾਲੀ ਬਾਹਰ ਦੀ ਦੀਵਾਲੀ
चाटा तो एक ही पड़ा था फिर अनेक कैसे हो गये
बिदाई की बिंदी आयी ढूढ रहे है अदर
अब यह क्या
फिर से वही
सास ससुर के भरपूर जुयो की राते
लुटेगी अदर भरपूर सौगाते
चोरी छुपे भरपूर मुकालाते
न निकले मूह से बाहरपुर फर(ारे) माते
ख़ाली माया का मोह भरपूर नहीं है
सब को भरपूर माया का मोह है
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