आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature View all posts by mandalalit