हमें तो कुछ-कुछ समझ सारा
यह शाति बायी क्यो उकसा रहा
हमें ही घर से बाहर निकलवा अहा
इस के तो काल के अदर कूडा काला
बहुत कुछ मिल—-भगत सगता साला
घर है दगना उछाल जल्दी वाला जाला
इसने सब है घर के अदर पता लिया
हम क्या करते है हर रोज पिया
देखे ध्यान से धार न धरे दिया
क्या उपाये है अंदर जिया
घर का मालिक ही न सुने
अनसुने आधे ध्यान धिया
