की-मच

पंछी तो ज़मीन पर बैठते ही नहीं पैर
तो चलो क्यो नही को दुनिया दा
कडपूर कूड़ा कि-खाते
कितने
क्यो नही रुड राते


पंछी दुसरे पंछी को मार के कच्चा खचा खच खाता
असुर किसे पकाते घर के अदर बहाते
खु()बू खा()ोश खो


ਕਿੰਨਾ ਦਾਨ ਦਹੇਜ ਸੁਟ ਸਾਦੇ ਦਫ(ਨਾ)ਤਰਾ ਦੇ ਦ()ੜਪੂਰ ਦਾਤੇ
ਤਦਿ ਤੇ ਗੁਟ-ਗਟ ਅਦਰ ਪੂਰੇ ਪਾਰ ਪ()ਹੇਜ ਪਤੇ


u _no it _ill ne_er _ap_en
हम-आरी गट गट गाटे गी तुम-हारो की क्यो नही की(मची)मारी

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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