गोदी के संसार के ख़ाली अंदर
दुःख-सुख तो बुँदियाँ ही दिन-रात पि-रोए
पाओ पोए परे पट खट खट खोए
बुँदियों को ना मिले मझधार
गोदी में तैर तहा तरपूर तिरदार
काहे का कंधे कुम्हार कहार
निवाला अदर नीवा बाहर बीमार
नि-ठले ठयू ठहरे उ उतरे उठाव
गोदी के संसार के ख़ाली अंदर
दुःख-सुख तो बुँदियाँ ही दिन-रात पि-रोए
पाओ पोए परे पट खट खट खोए
बुँदियों को ना मिले मझधार
गोदी में तैर तहा तरपूर तिरदार
काहे का कंधे कुम्हार कहार
निवाला अदर नीवा बाहर बीमार
नि-ठले ठयू ठहरे उ उतरे उठाव