ला-या

चाहे आपने गलत गुरराया
चाहे अपने सही सुख सुलाया
गोदी में तो गरपूर गंध गाड़ा गिराया
आधा जन्म करपूर काम किराया


घर साफ़ करने आये
घर वालो ने जूते जी जड़ जाड जराहे
क्यों नही इधर-उधर गरपूर गुरराये
दिखायो खायो बहार भी गिड़गिड़ाये

वेहले दामाद मे y-0-s in()id u बाली बैठा बा
चलो बहार का खरचा-खर्चा खानी खाडते खा

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment