गोदी की आंखे तो ज़मीन पे
सास की भरपूर कर-तू(मे)तो तो तेखती तही
भगवन को तो ऊपर का फल तोड़ने की भरपूर इच्छा होती
सास के दामाद की तूतू मे मे दुनिया के एक-एक की पढ़ाई
अदर ही भरपूर भूचा भरती
घर दे दाहर दो दूर की दात
तुम-हारी मे ने घर के अदर ही
ज़ुबान के अन्न-गनित बायने वास्ते विनयाये
जब जी बाके बान बरपूर बू बढ़ाये
