बाहर कलयुग का क्या हो यह तो सास के दामाद की
आखो को भरपूर भरा (इधर-उधर) भिखेगा
और gut के अदर का भरपूर कलयुग का काम-जाम
अदर ही गर()पूर गायेगा गाठो गा गमगीन गान
बाहर के अंदर
बाहर कलयुग का क्या हो यह तो सास के दामाद की
आखो को भरपूर भरा (इधर-उधर) भिखेगा
और gut के अदर का भरपूर कलयुग का काम-जाम
अदर ही गर()पूर गायेगा गाठो गा गमगीन गान
बाहर के अंदर