तुम-हारे अपने अदर आधा जन्म की सास दगी भरपूर भर डकैत डाके
फिर दमाद तो भूले भटके भाटा के ज्वार जाके उचा आखे
ठाठ बाठ पूरे आठ
अदर भिड़े भरपूर जूठे जाठ
भात भात के भिरे नर नाठ
धरो भरपूर धत धत धेरे धुली धाठ
तुम-हारे अपने अदर आधा जन्म की सास दगी भरपूर भर डकैत डाके
फिर दमाद तो भूले भटके भाटा के ज्वार जाके उचा आखे
ठाठ बाठ पूरे आठ
अदर भिड़े भरपूर जूठे जाठ
भात भात के भिरे नर नाठ
धरो भरपूर धत धत धेरे धुली धाठ