गोदी के पा(दा)ना का कि(हि)साब तुम-हारी दुनिया दिखाती दया
है ही क्या गोदी के अंदर तुम-हारी दुनिया की दी-वानी
सास के भरपूर दामाद की भरपूर एक-एक निशानी
गोदी की उछाले भरपूर फैलाये अपने अदर परेशानी
जेब के अदर भरपूर बीमा(या)रिया दुनिया के एक-एक को भरपूर प्यारिया
किसी को नही है ख़ाली तुमसे उम्मीद बाहरिया की नीद मे भरपूर भुम भाचो भिखारिया
भरपूर को भरपूर से मिलने के बाद वक़्त भरपूर जाया बर-बाश्त बाही बोटा
रिश्ते दुनिया को अपनी बाहर की मर()जी से क्या मोड़ते
भरपूर भोड़ना भी भुना भाना भोड़ते
भगवन का भरपूर आ-शीश-वाद है
सास के ददमाद अदर सबको एक-एक भरपूर याद है
कि नही तुम-हारी मर-जी
