वता पूर

भरपूर मर-काट के ही सब जी पक पकाती पा
हम हो भूखे भी भही भायेंगे बिना मर-बूर

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बाहर भरपूर नक़ल की बिना अदर येहसास शकल की अकल को बहार भरपूर अकाल आते आ

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ब()मीज़ तो भरपूर है सास की तलो की तमीज पर क्या भरेगी अदर भरपूर एक एक का कम-eas

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बिना क()मो के कोई किसी से मिलले माता आता

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न तो तुम हमें बैठने देते हो न खड़े होने न उड़ने न सोने
तुम्हे हमे नज़र न्योते न
चलो यान लो
y-0-s _ur is _ear
सास को अदर एक एक से अलग होने का दर अदर ही खड़काये खार खा खेहर
हाय मेरा १०० का भरपूर आधा टके का वाट वता पूर

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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