बिना गीले गी श्राप गिया
फिर तो पाप ही आप पिया
धुया धरदर धाप लिया
रत-रा रोये रात रिया
धत धोये ध-धात धिया
भरपूर सोचने से सास की सात सगी अदर जागी जात जा
मकरे की बा तो मनायेगी की मेर
तलो की भरपूर त्रास तले ताली तेर
बिना गीले गी श्राप गिया
फिर तो पाप ही आप पिया
धुया धरदर धाप लिया
रत-रा रोये रात रिया
धत धोये ध-धात धिया
भरपूर सोचने से सास की सात सगी अदर जागी जात जा
मकरे की बा तो मनायेगी की मेर
तलो की भरपूर त्रास तले ताली तेर