घर का कैदी अदर लका लाये
कला भरपूर भरी दुनिया अदर भाये
सास क्या जाने अदर-रक के रुके का स्वा()द
कल न पछताये आज पुछाये क्या हुया जब ठोड़ी ठग गयी अदर ठेठ ठाय
लाठी भाई अदर बाटी
तो इद्री हठ अदर भरपूर आती
भरपूर तल के ९०० ताल खुजलाये अदर एक बल बाये
घर का कैदी अदर लका लाये
कला भरपूर भरी दुनिया अदर भाये
सास क्या जाने अदर-रक के रुके का स्वा()द
कल न पछताये आज पुछाये क्या हुया जब ठोड़ी ठग गयी अदर ठेठ ठाय
लाठी भाई अदर बाटी
तो इद्री हठ अदर भरपूर आती
भरपूर तल के ९०० ताल खुजलाये अदर एक बल बाये