दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला
बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च
बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे
गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे
दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला
बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च
बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे
गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे