-यसत

न दुनिया का एक दिन तुम्हे जान बुझ के व्यस्त रखता है
या फिर तुम-हारे अदर भुझी हुई जान का एक-एक

सस्ता दुखता है और दिखावा दिखता दाव


दुनिया के अदर के क()म तो रोज ही मिलने आते है
फिर सास फौरन ही इतनी हैरान h-u खाती भरपूर रहती है


दुनिया का एक दिन गुजर जाने के बाद घर बहुत करीब लगता है
किसका

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment