भरपूर कि-राया

एक दिन एक दिन एक दिन
एक दिन गिनते रहते है
राते क्यों नहीं गिनते
अनगिनत

क्या

जितना कहा उतना ही बोला
उससे सास को ख़ाली सीधा बेसमझ आ ही गया तो बोला
कौन
भय रोया भरपूर किराया भोला

भगवन रात को सपने मे आते है
और दिन की हक्क-की()कत अदा आरते है

पता ये

सास को _t& लेना पड़ता है
_heel के धोने को दहा()ड़ने के लिये


न ज़मीन पे बैठ के नहीं रो-रेग सकती

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Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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