जब ख़ाली डंडे ही असुरो के भरपूर का
कुछ बिगाड़ नहीं सकते तो
ख़ाली आधा तो गोदी में डूबा हुआ है
तैरना नहीं आता
आधे को तो एह भी नहीं पता
बूंदियो की सा(हा)या(आ)ता होती है
gut गोदी में पता नहीं
कहां बहती है बूंदिया
जब ख़ाली डंडे ही असुरो के भरपूर का
कुछ बिगाड़ नहीं सकते तो
ख़ाली आधा तो गोदी में डूबा हुआ है
तैरना नहीं आता
आधे को तो एह भी नहीं पता
बूंदियो की सा(हा)या(आ)ता होती है
gut गोदी में पता नहीं
कहां बहती है बूंदिया