जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते
जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते