जीवं()त

स्थिरता में सास से नही लड़ोगे तो स्थिर साँस तो जीवित भी नही भरेगी

वेहली है दुनिया अदर दुयी निया
खाली वेला तो है गोदी की रात की बूँदिआ

शरीर की मैल रहे घर के अदर तूतू मै मै की छैल
आत्मा नही रहती खाली कब्र की फरजी फैल

काल कनुकान

घर के अदर तो मरे हुये शरीर को रखते है
बाहर तो आत्मा को भी कोई नहीं मार मुक्ता


सास तो अपने निर्धारित नमय ने नई नाल नही

इसका अनुमान कोई भी नही लगा सकता
अदर-बाहर

अब अपने नरपूर नाम नदलो