s_ill b_eathing 0 _it
brea_hing _till
in(नर)s_it
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brea_hing _till
in(नर)s_it
खुद के अदर मारने के लिये शूद्र
बिंदु के लिए ब्राहमन न बना मुग्ध
बचे जो काटे क्षत्रिय जडपूर जाटे
न जताये प्यार वैश्य मरा मार माटे
गुरूजी का आशी()वाद
सुनाये नही
अदर मा का अनु(अंतिम)वाद
8 के है धडपूर धनि
9 तक नही आन बनी
कहा से आयी मै मनी
तू तो है आधा कनी
स्थिरता में सास से नही लड़ोगे तो स्थिर साँस तो जीवित भी नही भरेगी
वेहली है दुनिया अदर दुयी निया
खाली वेला तो है गोदी की रात की बूँदिआ
शरीर की मैल रहे घर के अदर तूतू मै मै की छैल
आत्मा नही रहती खाली कब्र की फरजी फैल
प्यार पे पिक्ला पाके पैला
मजनू का न मिला थैला
अदर नही मरा मरपूर मैला
बाहर छबीला उछला छैला
घर के अदर तो मरे हुये शरीर को रखते है
बाहर तो आत्मा को भी कोई नहीं मार मुक्ता
सास तो अपने निर्धारित नमय ने नई नाल नही
इसका अनुमान कोई भी नही लगा सकता
अदर-बाहर
अब अपने नरपूर नाम नदलो
छेद करना तो आता ही नही
जिस थाली मे खाते है उसी को वही
नगा नरके दि(बही)खाते बरपूर बही
o_en inनर _ir-c_l _ent
ra_vesh ra_vesh
en_er zee ma l desh
ho_nail _ert vesh
mes men germ sesh
छूटा तरतालित तीन अदर सत्तर सेक् एर
मोह अली बना बुरा बैक एर
रह गया पीछे तारो का मे एर
अब न कोई जाये बाहर बे हर
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