य मा-या

शर()पूर शक्ति मार-पूर माया
तू अदर बाया कल का एक मे बल-काया
बुरा है अदर दुनिया ख़ाली दया साया
ई()खो दुनिया मे दी भरपूर ख़-माया


बाहर की दुनिया इधर खुली सड़क भरपूर उधार भड़क
और सास के दामाद अदर एक-एक अकड़ आजा पकड़ भरपूर बाहर जकड़

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क्या क्या क्या

सास की भरपूर आखो नगी न तो भरपूर अग भी जगा जा सुन-बहरी ने सगा सा अदर आ मचले मगा मा


आज भरपूर अच्छा करने से अदर सास के अधरम आज के भरपूर भरम भमा भाते
दिसका दाया दाते


अब तुम-हारो के पास अन्दरायी अमय अहि आ
बाहर नमय तो दूर ढायेगा ही भरपूर भय भा


जब pres()n-t मे y-0-s in()id u का यही भरपूर हाल
तो ab_en(10)ce मे होगा y-0-s out()id u भरपूर भाल
or _ice ver_a _all


ਇਸ ਸਾਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਭਰਪੂਰ ਕੱਖ ਕਾ
ਇਹਦਾ ਬਲ ਮੇਟ ਅੰਦਰ ਪੂਰਾ ਵੱਖ ਵੱਖ ਵਾ

टल-मल

गोदी में भरपूर अच्छाईयों-बुराईयो का नाश नो
दुनिया मे सास के दामाद अदर एक एक का वि(ष)नाश शो


दुनिया मे दो जि-कर का एक lo_ic लगता ला
गोदी में ख़ाली ma_ic मारता मा

एक तत्व का बल मत यह है की अदर एक तो है
ख़ाली महत्व एह ख़ाली रह अंदर गोदी की गय

ऊपर वाला तो ऊपर तय तरता किसको किस से टलना टा ऊपर ही मलना मा
दुनिया के अदर तो सास का भरपूर दामाद अपनी मरजी से ही किस किस
भरपूर के अदर भय भरता अपने को छोड़ के बाहर एक-एक को पकड़ता

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w_en _id _other ea()th _mile in adha re_urn _ile

y-0-s _oster it un_eal _it

y-0-s _ife is 0 _inged he()d th@ no 0 f_y

y-0-s ba_ance m()al wit _ol res_ect y _aste _id in()id _aste di_elect _ud _spect

avo_d _nac_ing un_en_or be_avi()

a y-0-s wa_er _ill _eep u un_ounded in()id full_ess _ind s_ir

भेरा क्षा

आप ने एक एक लेन की अदर देदी देरी
और अब आप भायेगे भरपूर भेदी भेरा-फेरी

भरपूर भावना अज्ञात आती आ भरपूर उज्वल उठती आ
और शरीर का एक एक सताया आखो आगे अखती आ

काली सास के भरपूर दामाद की भरपूर श-रते शो()धित क्षति क्षा
सफ़ेद बाल आशाढ़ का ख्याली ख़ाली पाल

दया याद

गोदी के पा(दा)ना का कि(हि)साब तुम-हारी दुनिया दिखाती दया
है ही क्या गोदी के अंदर तुम-हारी दुनिया की दी-वानी
सास के भरपूर दामाद की भरपूर एक-एक निशानी
गोदी की उछाले भरपूर फैलाये अपने अदर परेशानी

जेब के अदर भरपूर बीमा(या)रिया दुनिया के एक-एक को भरपूर प्यारिया
किसी को नही है ख़ाली तुमसे उम्मीद बाहरिया की नीद मे भरपूर भुम भाचो भिखारिया

भरपूर को भरपूर से मिलने के बाद वक़्त भरपूर जाया बर-बाश्त बाही बोटा

रिश्ते दुनिया को अपनी बाहर की मर()जी से क्या मोड़ते
भरपूर भोड़ना भी भुना भाना भोड़ते

भगवन का भरपूर आ-शीश-वाद है
सास के ददमाद अदर सबको एक-एक भरपूर याद है

कि नही तुम-हारी मर-जी