आधा जन्म कब होगा सास के अदर
अकेला नही है समाज का नक़ल मेला
सास के अदर का नही चेला
आधा जन्म कब होगा सास के अदर
अकेला नही है समाज का नक़ल मेला
सास के अदर का नही चेला
s_ut है सास _lut है ससुर प्यास
मिला मिलाप बन गया बाप
तू तेरा तरपूर तिला ताप
मै मेरा छुपा छु()दर छाप
नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
तेरी हसरत न होगी पूरी
बीच मे अदर है दगी दूरी
जो मिला मै फितरत तूरी
ले आया माफिला मजबूरी
नडायो नडा नरपूर नदर नूरी
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
खुद के अदर मारने के लिये शूद्र
बिंदु के लिए ब्राहमन न बना मुग्ध
बचे जो काटे क्षत्रिय जडपूर जाटे
न जताये प्यार वैश्य मरा मार माटे
छेद करना तो आता ही नही
जिस थाली मे खाते है उसी को वही
नगा नरके दि(बही)खाते बरपूर बही
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wit_out ever-y1′ ever-y1-t_ing out()id _ew
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बिना सोचे ही भरपूर भानुमान
गोदी के आधे का ख़ाली ध्यान
दूयिया के अदर नही है निशान
क्यो कही के पास नही है
ख़ाली ज़मीन का आसमान
आधे हरीआली गोदी आन
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