सच सूरा सच

दिन भर भरपूर झूठ सच
रात रो दस्त दवा दच दच


दिन का सच न साडे सडे
रात का अरथी रथ रडे

आधा न तो घर के अदर है और न बाहर
कब को ढूढ रेहा के बर को
कबर के बूहे कहा को

दर दाज

जितनी खुली ज़ुबान उतनी जूठी जस जात जहाज जहान
जा खू()ली रात री रात

बाहर दिखावे दी दडपूर दिज्जत
और अदर विस()की क्यो कही कि-काली कि-जत

ਭਾਰਾ ਭਾਣਾ

ਜੋ ਵੀ ਕੀਤਾ ਰਬ ਕੀ ਕੀਤਾ

ਇਸ ਭਾਣੇ ਵਿਚ ਦੂਯੀਯਾ ਦੇ ਇਕ ਇਕ ਦਾ
ਸਲਾ ਮਸ-ਵਰਾ ਪੂਰਾ ਪਿਯਾ ਪਾ
ਸਿਰਫ ਮਾ ਨੇ ਈ ਰਬ ਨੂ ਛਡਿਆ ਨੇ ਮਾ ਨੂ ਛਡ ਛੂਟਾ
ਰਬ ਦੀ ਬਨਾਇ ਦੂਯੀਯਾ ਵਿਚ
ਮਾ ਨੀ ਮਿਲਦੀ ਅਸੁਰਾ ਨੂੰ

ਇਹ ਕਿ
ਇਹ ਵਰ ਕਿਊ ਮਸਿਯਾ ਮੋਯਾ
ਤਦਿ ਤੇ

बे-रोज(अ)ग()र बे(टा)टी t_ump

पेटी पडायो बेश बचायो

अच्छा अब कलयुग के अंतिम पड़ाव पी
पेटिया देश दे दिये दहाडने देखेगी

भरपूर पैट पा पसार
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तुम-हारे घर मे घेटो घो घडने पन्ने-पखावट पा पिवाज पही पा
अब भेटा भुना-भाना भायी भनावट भारा भा

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प्यार पाया

भरपूर नजरो मे म()हर मिलाया
करमो का अदर कडपूर किलाया
गाठ गिल्गीले दु()बारा एक भुलाया
गाठ गे गु()डे टूटा टेक टिल टरमाया
शीशा शा शेक पाठो पे पूरा पुपाया
ज़ुबान जय जाया जिन जे जिकराया