घर के अदर की मूर-तीया अदर समा(दा)ज का दिखावा
समाज का शहर शर-तीया पहनावा बाहर का बुलावा
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दूसरे घर के आदर परिनाम
क्यो कही के घरो के कमरे भी प-वितर होते है
हा हसोयी मे सब-जियो के कीटानुयो का
करमा एक-एक काटता का
आप जूते पहन के अदर आ जायो
कोई काट कही यह कमरे मे भी
साया सकते सा
घर के अदर आ के परनाम परते पा
बाहर से जुबान जय जमाज का परिनाम पाफ पहि पा
तुम हिदू समाज का घर होने के बावजूद भी
दूसरे गह्रो मे अदर जूते जडते जा
अब यह तो इनके घर के घमाज घसूल घ
पूछने पर ही पता पलता पा
hosपिटal
hosपीटल मे जूतो को कपडे प()नाते
दरजा दमाज दा घर घर घाव घकल घटते
काम कही बराबरी का कट-कट कटते
झुको झुको झल्लो झहाज जटते
जरा जेखो
शाति बायी को बहुत गरमी(जाज) जगती
ठडी ठडी क्यो कही कडक कुड-कुड कुडती
डरा-मे
तूतू मै मै से क्या सिकता
बिना बोले वास सस्ता विकता
घर घर के अदर रास रुकता
चुप चाप रखा है या खडा है
अदर के बाहर
यह क्या टाग रखा है
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w_a_t it ta_es is
u in()id y-0-s _ill w()ill-age
2 _e@her 1 _or_d
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आत्मज्ञान की अदर हत्या
तूतू मै मै का बाहर सत्य
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hom a_ay f_om hom
ri_ & _it out _oam
_rong in()id _oam
far out inनर _oam
फफायी अभि()यान मान
जन जन बाहर लोटा दुयिया अदर घला घोटा
गला गोटा भला भोटा
तू बूढ़ा मै बचा शाह
सौदा समाज सच्चा साह
गन्दगी अदर आशा नि()चाह
वह वोह वारपूर वाह
तूतू मै मै ने निसने नाता नोडा
समाज सा सुधार अदर निगोडा
जहा जहा तूतू मै मै की जुबान वही
होती प(द)ढाई जन जन की पहचान
आप ने हम से शादी करके तुम
पैदा किया तूतू मै मै का समाज
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wit_out o_er_ooking
आधा जन्म hoo_ing
एक-रे
घर घी घसोई मे अग अग क()जी झडने से
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