बिंदी गवती

gut गोदी के अंदर के

आधे सांसो को भूला कर

तल की सास का भरपूर आधा

_m-art समझ्ते है

अंदर-बाहर

इधर-उधर

अब छांटी तो होगी ही

कितने जनमो के अंदर बिंदी गवती

gut मईया के ख़ाली डंडे पर भरपूर

शक हो रही है तो कश कर को

सास को तूतू में में को भू-लेन

भालने में आसानी

होगी अब

भरपूर बाहर की तूतू में में बहुत गवाती

अब घर के अंदर की ख़ाली मेहनत

लौटाओगे

gut गोदी के बच्चो की चुपी

गोदी के gut की चुपी को

सुरक्षित करती है


तुम्हारे घरो को तुम्हारी तूतू में में

की भरपूरता भी भर भर के

जू को जांचती जय


रक्षित के आगे को ही सू कस रखा है


चुपी लौटाई ला ळक्ति लो साँस के अंदर

लेकिन भरी बान के जु कैसे लौटाओगे


इधर उधर कर लिया ma()ch

ख़ाली बातें सम्पूर्ण

सास के दामाद पे

अंदर की लाते

पड़ रही है की

सो रही हसी की


gut nature’ की ख़ाली

बातें सम्पूर्ण हो रही है

(एह आधा म क्यों बिंदी क्यों नहीं)