y un()not u _ear
g(ut)odi’
si_ence
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g(ut)odi’
si_ence
आधे की बंद आँखों की नुमाईश की है फरमाईश भरपूर चाहे एक ख्वाईश
असुरो को ख़ाली बिठा के अब बांधे है गोदी मे समाने की गुंजाईश
अब क्या वा()धे के आधे से शा(त-ब)दी करोगे
फिर उलटी टांगे डालेगी भगड़ा गोदी के आसमान मे
hang_ed _an
दुनिया की एक सास का वास
नही शामिल गोदी के अंदर का उपवास
ख़ाली हो गोदी का सारा निकास
आधे की एही प्यारी प्यास
कब खुले बूंदियो की ख़ाली आस
gut मईआ ने आंखे बंद किते ही
सास को पल-पोस
के बड़ा कर दिया और सास की
आखे तो खुली ही रहेगी आधा जन्म
की उंचाईया की गिरावट मापने के लिये
फिर बड़ा को ख़ाली कौन करेगा
तेरा भरपूर ख्वाब
पभी पूरा पो पाया पय
तुम-हारे आधा जन्म के भरपूर अदर
की मौत तो भरपूर पैदा होने से पहले ही
तय है नहीं भरेगा आज का भय
ख़ाली तैरेगा गोदी के
अंदर ख़ाली लेय
a hi_hest full_ess _eak of
one in()id kal–uga,
a str8 _all to_ard
em_tee _ual
_round
un()on u-ga
an em_tee
_ual _word is
to()tal _harp
pro()e_cting wit()in
_ap of gut nature
to()tal wiw o
_arp
तूतू में में की दुनिया तो भरपूर
दुरभाग्य की बदौलत ही
पूरी बद की दौलत है
gut गोदी में ऐसी दो-लत ख़ाली है
for u _an nei()er i()nore
n-or _un-ish bharpoor be()or
th@ _ook in()id un-o()n _oor
रात को दिन बना रखा है और दिन मे ही बाहर निकलते है न
भरपूर दुनिया भी निकलेगी ब्रह्माण्ड की रात के अंदर
१-१ कलयुग मे ऐसा एक कही कई बार-बार को लेके आता है
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