नहीं पता

जब ख़ाली डंडे ही असुरो के भरपूर का

कुछ बिगाड़ नहीं सकते तो

ख़ाली आधा तो गोदी में डूबा हुआ है

तैरना नहीं आता

आधे को तो एह भी नहीं पता

बूंदियो की सा(हा)या(आ)ता होती है

gut गोदी में पता नहीं

कहां बहती है बूंदिया

अदर बाहर ढलते

आज को अंदर गोदी का अच्छा-बुरा

सारा पता है ख़ाली बूंदिया ख़ाली

घरो में कुसकती नहीं है और

सास के दामाद को मर्द की ईंट मारनी है

अपने घर को अदर बाहर ढलते