कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
हाथी जंगल में अकेले ही चलता है
इसी लिए भार का च-लान आसान ख़ाली होता है
दुसरे विचार को जिन की दगी पे दाग लगाने से निकाल ही दो की कुंजी है
जुबान और कर्म को ma()ch कैसे करते है
_h@ev-er quan(li)ti()y g()owth me-a-su()red bie
a qua-lit-y err in()id u in on his()or-y of man-y wor_d
in()id kal_uga is to con()rol ever-y-thing
in(out)id gut nature
बलगाडी के पहीये बल का पीछा करते है
आधा ने ही तो बनायी थी
क्यों युग में कल
आज के
बैल के सींघ को भी नहीं छोड़ा
i _ood do
ever-y-thing in()id u
(& me)
for ha_f wit()in chi_d to
be af()aid of on half
on _ast ma()ch
gut godi’ _ar_ness
vs
on wor_d _tar_ness
भरपूर कितना के ख़ाली कम-आया
आधे की प-हेली जन्म की भरपूर अंत के ख़ाली अनंत से
_ll spec()es o-n this plan-et
_no _ow to giv b_r-th
& pro()ect _oung bab()ie
asur wit()in y in()id
u()eing is a not spec-ies
आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है
इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है
अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है
भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है
आखे दिखाओगे तो ख़ाली की
भरपूर बिजली है
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